Wednesday, January 30, 2013

वामा विचार दे कर आये हैं,ले कर जायेंगे. नीता झा Saturday November 10, 2012 1 दे कर आये हैं इसलिये ले कर जायेंगे. यह बयान भागलपुर विश्व विद्यालय के एक पूर्व कुलपति का था . तब से यह सिलसिला चल निकला है . जब हम पढ़ते थे तो हमे याद है ,कुलपति का पड कितना गरिमामय होता था .छात्र क्या शिच्छक भी कुलपति से एक स्ममानजनक दूरी बनाये रखते थे .राष्ट्र कवि दिनकरजी जैसे महान व्यक्ति इस पड की शोभा बढ़ा चुके हैं. लेकिन फिलहाल जो माहौल बन गया है उसमे आजकल के कुलपति एक साधारण घूसखोर अधिकारी बन गये हैं . ऐसा प्रायः बिहार -झारखण्ड के सभी विश्व विद्यालयों मे हो रहा है . .पहले के कुलपति अपने मातहतों के मध्यम से लेते थे अब जमाना चूंकि पारदर्शिता का है इसलिये श्रीमान डाइरेक्ट ही लेने मे विश्वास रखते हैं एक हाथ दे - एक हाथ ले वाली व्यवस्था है...यहाँ सब चीज बिका उ है डिगरी ,पड , प्रमोसन ट्रांसफर. खून मुंह मेइस तरह लग गया है की अब प्रोफेसर कौलोनी के क्वाटर अलॉतमेंट मे भी पैसा लिया जाता है . निर्लज्जता ऐसी की हनुमान चालीसा की भी नई व्याख्या कर डाली .कहते हैं ''होत ना आग्या बिनु पैसा रे'. विस्व् विद्यालय के सारे महत्व पूर्ण पड अपने जैसे लोगों से भर लिया है. तथ्य को जस्टिफाई करने के लिये कहते हैं की' भई अब तो मंडलम भ्गवान विष्णु मंडलम ........का ही जमाना है..भयंकर अराजकता का माहौल है .बात अगर मुख्य मंत्री की हो तो वे यह कह कर प्ल्ला झाडलेते हैं की ,इन की नियुक्ति केन्द्र से हुई है इसलिये वे कुछ कर पाने मे असमर्थ हैं......एक ही समय मे दो-दो विश्व विद्यालयों का प्रभार! यानी दोनो हाथ ,घी मे . इनका तो कोर्ट भी बालबांका नही कर पाया . शिच्छा माफिया कैसे काm करता है यह देखना हो तो यहाँ आयें .च्छत्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है .जान बूझ कर उनका रिजल्ट पेंडिन्गमे डाल दिया जाता है ताकि कुछ वसूली हो सके .बच्चों का इसी मे एक साल बर्बाद हो जाता है इसकी किसी को चिंता नही है ऐसे मे कुछ शिच्छक हैं जो निर्विकार भाव से अपना काम किये ja रहे है .

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