Sunday, April 28, 2013

sita ,tumhare mayke vale aaye hain!

जब हमारा सीतामढ़ी जाने का कार्यक्रम बना तो मुझे बडी ख़ुशी हुई।दरअसल हम मिथिलांचल के लोग सीता जी को अपनी बेटी मानते हैं .खास कर नेपाल सीमा से सटे छेत्र (जनकपुर .जो सीता मैया का जन्म स्थान है )के लोग .हम अभी भी अपनी बेटियों का विवाह उस तिथि को नहीं करते ,जिस दिन राम -सीता का विवाह हुआ था .यह सर्व विदित है की सीता जी का विवाहित जीवन कभी सुखी नहीं रहा .बल्कि यहाँ के लोक गीतों में श्री रामचंद्र को उलाहना भी देते हैं ,क्योंकि इस नाते वो पूरे मिथिलांचल के दामाद -बहनोंई हैं .बिहार के सीतामढ़ी का इलाका अगर उनका मायका है तो उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के पास जो सीतामढ़ी है वो उनका ससुराल माना जायेगा .इस तरह यह सम्बन्ध निभाने जैसा लगा .इलाहाबाद से डेढ़ घंटे की दूरी पर यह स्थान है और माना जाता है की सीता जी इसी स्थान में धरती में समाहित हो गयी .थीं . . वहां पहुँच के सुखद आश्चर्य हुआ की उस सुदूर देहात में इतना सुन्दर और भव्य मंदिर ! इस मंदिर का निर्माण दिल्ली के बड़े उद्योग पति श्री लोयड ने करवाया है .मंदिर और वहां की मानव -निर्मित दृश्यावली इतनी आकर्षक है की जी नहीं भरता .मंदिर के चारों ऑर प्र कृ ति की निराली छटा मन मोहने वाली है . मंदिर प्रांगन में ही बाहरी पर्यटकों के लिए सभी सुविधाओं से युक्त गेस्ट हॉउस और शानदार रेस्टोरेंट भी है .मैंने देखा एक नव -विवाहित ग्रामीण दम्पति उस रेस्टोरेंट में आ कर खूब खुश थे . सही भी था ,जो अपनी पत्नी को इलाहाबाद घुमाने नहीं ले जा सकता है उसे वैसा ही आनंद अपने गांव में मिल रहा था .मंदिर के बाहर ग्रामीण मेले का नजारा हमे खूब भाया . दर्शन के बाद चूँकि हमारे पास काफी समय था इसलिए हमने गाँव घुमने का विचार किया .क्योंकि हमारी ट्रेन रात की थी .. वहां दयावंती स्कूल देख कर मै आश्चर्य चकित रह गयी .गाँव में इस तरह के स्कुल की मैंने कल्पना भी नहीं की थी .शहरों वाली सुविधा तो है ही .पढाई भी बढ़िया लगी बच्चे फटा फट अंग्रेजी बोल रहे थे .जो प्रायः ग्रामीण विद्यार्थियों का सपना हुआ करता है .रहने के लिए शानदार हॉस्टल ,हॉस्पिटल , बी .एड की पढाई .वाह !ये सारा कुछ पुंज लोयड कंपनी के सौजन्य से है .धन तो बहुतों ने अर्जित किया होगा लेकिन मंदिर , उस से भी अधिक शिक्छा का मंदिर बना कर इन्होने अपने धन का बड़ा ही सार्थक उपयोग किया है इस नेक काम के लिए मैंने मन ही मन उनका धन्यवाद किया और यहाँ की मीठी यादें ले कर वापसी को निकल पड़े ..........