Friday, January 30, 2015

गुमशुदा ,एक नन्ही परी


दरवाजा खुलने की आवाज होती है ,पहले उसका चेहरा अंदर आता है ,चारों ओर मुआयना करती उसकी गोल, बड़ी-बड़ी आँखें ,अगर अंदर सब कुछ ठीक लगा तो ,पैर घर के अंदर रखने से पहले ही उसकी स्टोरी शुरू हो जाती है .आपको कुछ पता है दादी ,आज मेरी सबसे अच्छी फ्रेंड ने मुझे धोखा दे दिया .वो नौ दस साल की प्यारी सी बच्ची,शाम को अक्सर हमारे घर आ जाती थी ये उसके खेलने का समय होता था लेकिन उसने हमे बताया था की उसे खेल से ज्यादा बातें करना अच्छा लगता है .वैसे भी खेलने के मामले में उसे अपने छोटे भाई से काफी शिकायतें थी .मसलन उसके घकेला -घकेली वाले खेल में वो जब गिर जाती है तो भाई उसे उठाने के बदले तालियाँ बजाता है और उसका मजाक उडाता है .क्रिकेट में भी उससे सिर्फ बोलिंग करवाता है और दूर बौल जाने पर बौल लाने  उसे ही उस खडूस आंटी के घर जाना पड़ता है क्योंकि  आंटी भाई और उसके दोस्तों को बौल नही देती है और डांटती भी है .तब वही अच्छे से सॉरी आंटी, बोल के बौल लाती  है .तब हम उसकी तरफदारी करते हुए कहते है ,वो अपने भाई से कट्टी  क्यों नही कर लेती है ?क्या फायदा ऐसे भाई का? फिर तो उसकी ममता फूट पडती है, कहती ,अरे दादी ,ऐसा मै नही कर सकती  .क्योंकि मम्मी ने कहा है, जब मेरी शादी होगी तो भाई ,मेरे साथ ससुराल जाएगा, और जब लिवाने जाएगा तो  मिठाई के साथ जाएगा ,उसे मीठा बेहद पसंद था ,वजह सही थी इसलिए समझौता हो जाता था .मुझे कहानियाँ सुनाना अच्छा लगता है लेकिन उसे अपनी किस्से कहानियों से फुर्सत मिलती तो सुनती. उसकी एक आदत पर मैंने गौर किया था ,हमारे घर में प्रवेश के वक्त उसकी नजरें घड़ी की ओर जरूर जाती थी .वैसे भी  चाहे कैसा भी दिलचस्प किस्सा हो .नियत समय पर उठ खड़ी होती थी .शायद ये ममी की हिदायत रही होगी .      
           एक दिन उसने हुलस कर बताया ,कल गांव से उसके दादा-दादी आने वाले हैं .और ये भी कहा की वो उन्हें हमसे मिलवाने जरूर  लाएगी .दो तीन दिन बीत गए फिर वो नहीं आई .हम थोडा परेशान से हो गए ,कहीं उसकी तबियत तो खराब नही हो गयी ?उसके मम्मी –पापा से हमारा कोई खास परिचय नही था.उस चैट्रर बॉक्स {मेरे पति उसे यही पुकारते थे }की वजह से उनके साथ हमारा , नमस्ते ,कैसे हैं ?जैसा रिश्ता था .हमसे रहा नही गया ,हम उसके घर जा पहुंचे ,दरवाजा उसी ने खोला ,हमारे हाथ में उसकी मनपसंद चौकलेट थी ,वो चहक पड़ी ,उसने झट से पैकेट ले लिया .हम दरवाजे पर ही खड़े रहे , पीछे से एक बुजुर्ग महिला निकली जाहिर था वो उसकी दादी रही होगी .हमने उनका अभिवादन किया ,पर उनकी नजरें उस चौकलेट पर पड़ी ,बच्ची थोडा सहम सी गयी ,हमने जल्दी से अपना परिचय दिया ,लगा ऐसा नही करने पर कहीं वो चौकलेट लौटा न दे .उन्होंने हमे बैठने को कहा .फिर हमने थोड़ी बहुत बातें.की ,उस वक्त घर में सर्फ वही थीं .हम जल्दी ही उठ गए . काफी दिन बीत गए वो नन्ही पारी फिर कभी नही आई ..................जिंदगी यूँ की यूँ चल रही है .एक कचोट सी दिल में है ,काश...............
 कोई ये बता दे की उस मासूम को क्या कह कर हमारे घर आने से रोका होगा .कहीं कोई ऐसा जहर न भरा गया हो जिसकी वजह से एक मासूम जिंदगी भर किसी पर  भरोसा न कर सके .                                                                        

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